सेवा ही मेरा धर्म कुछ यात्राएँ सिर्फ यात्राएँ नहीं होतीं ,वे भगवान की कृपा का अनुभव बन जाती हैं।

सेवा ही मेरा धर्म कुछ यात्राएँ सिर्फ यात्राएँ नहीं होतीं ,वे भगवान की कृपा का अनुभव बन जाती हैं।
पुनीत गुप्ता
कैलाशपर्वत
गहोई दर्शन पत्रिका वैश्य एकता अखबार
ओम पर्वत के दर्शन की मेरी यह यात्रा मेरे जीवन के सबसे अविस्मरणीय अनुभवों में से एक है। भारी बारिश के कारण मेरे साथी वापस लौट गए, लेकिन मेरे मन में बस एक ही इच्छा थी—दर्शन करके ही लौटना है।
और शायद भोलेनाथ ने मेरी प्रार्थना सुन ली…
अचानक सड़क पर पुनीत भाईसाब और जितेंद्र भाईसाब की गाड़ी मिली। मैंने ॐ पर्वत के लिए लिफ्ट माँगी और उन्होंने मुझे अपने साथ लिया और फिर जो यात्रा शुरू हुई, वह शब्दों से परे है।
रास्ते भर गाड़ी मे बोल “शंकर भगवान की जय” के जयकारे, लगते रहे ओम पर्वत पर पहुँचकर बर्फ का शिवलिंग बनाना और पुनीत कुमार गुप्ता जी ने विधिवत् पूजन एवं प्रार्थना की। उस समय ऐसा लगा जैसे हम साक्षात शिवलोक में, भोलेनाथ के चरणों के समीप खड़े हों। वह ऊर्जा, वह भक्ति और वह अनुभूति जीवनभर हृदय में बसी रहेगी।
आज मन में बस यही भाव है कि भगवान जब व्यवस्था करते हैं, तो अपने भक्तों के माध्यम से करते हैं। पुनीत भाईसाब और जितेंद्र भाईसाब मेरे लिए माध्यम बने।
इस दिव्य अनुभव और आत्मीय साथ के लिए आप का हृदय से बहुत-बहुत धन्यवाद।
हर हर महादेव!
ॐ नमः शिवाय
पद: क्षेत्रीय प्रतिनिधि
शहर: कैलाशपर्वत